कृष्णमोहन झा (लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विगत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय केशव कुंज में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर संघ के संस्थापक डा केशव बलीराम हेडगेवार  और भारतीय संविधान की रचना में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले डा भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमाओं पर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री ने माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर का  शिलान्यास भी किया। संघ के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री का यह नागपुर प्रवास अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसके कई निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री के रूप में विगत ग्यारह वर्षों में उन्होंने पहली बार संघ मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।  प्रधानमंत्री के इस प्रवास को निकट भविष्य में होने जा रहे भारतीय जनता पार्टी के नये अध्यक्ष के चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के इस नागपुर प्रवास को लेकर भले ही तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हों परंतु दर असल आवश्यकता तो इस बात की है कि उन सभी राजनीतिक कयासों को परे रखकर  प्रधानमंत्री  के उस उद्बोधन पर गौर किया जाए जिसमें उन्होंने राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महत्वपूर्ण भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी इसके पूर्व जुलाई 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नागपुर आए थे। उल्लेखनीय है कि  बतौर प्रधानमंत्री नागपुर आने वाले मोदी दूसरे प्रधानमंत्री  हैं  । उनके पूर्व सन् 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेई ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू नववर्ष के शुभारंभ के पुनीत अवसर पर माधव नेत्रालय के प्रीमियर सेंटर के शिलान्यास हेतु हुए प्रधानमंत्री के आगमन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आज डाक्टर साहब (डा हेडगेवार) का जन्म दिवस है और आज संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर' गुरूजी ' के नाम पर कार्यरत सेवा प्रकल्प के विस्तार कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री यहां उपस्थित हुए हैं। सारे शुभ योग हैं जब सारे शुभ योग एकत्रित होते हैं तो उसके लिए तपस्या करनी पड़ती है। संघ प्रमुख ने कहा कि स्वयंसेवक समाज के लिए काम करते हैं। यही प्रेरणा है जिससे उन्हें कष्ट सहने की प्रेरणा मिलती है। स्वयं सेवक इसके बदले में कुछ नहीं चाहते। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उद्बोधन  में कहा कि इसी साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गौरवशाली यात्रा के 100 साल पूरे हो रहे हैं और इस अवसर पर मुझे स्मृति मंदिर जाकर पूज्य डाक्टर साहब और पूज्य गुरु जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य मिला है। मेरे जैसे जैसे अनगिनत लोग परमपूज्य डाक्टर साहब और पूज्य गुरुजी के विचारों से प्रेरणा और शक्ति प्राप्त करते हैं। इन दो महान लोगों को श्रद्धांजलि देना मेरे लिए सम्मान की बात है जिन्होंने एक मजबूत , समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली भारत की कल्पना की थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत में भारत पर अनेक आक्रमणों के बावजूद हमारी चेतना समाप्त नहीं हुई। उसकी लौ हमेशा जलती रही । उसे जागृत रखने के लिए निरंतर सामाजिक आंदोलन होते रहे। हमारे संतों ने अपने मौलिक विचारों से समाज में प्राण फूंके। स्वामी विवेकानंद से लेकर डाक्टर साहब तक , किसी ने भी उस चेतना को बुझने नहीं दिया। राष्ट्रीय चेतना का जो बीज डाक्टर साहब ने 100 वर्ष पहले बोया था वह आज विशाल वट वृक्ष का रूप ले चुका है। स्वयंसेवक इसकी टहनी के रूप में कार्य कर रहे हैं। संघ के सिद्धांत और आदर्श ने इस वटवृक्ष को ऊंचाई प्रदान की है। संघ भारत की  अमर संस्कृति का  आधुनिक अक्षय वट है जो सामाजिक चेतना और भारतीय संस्कृति को ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री ने प्रयागराज में संपन्न महाकुंभ के कुशल प्रबंधन में संघ के स्वयंसेवकों के सेवाभावी योगदान की सराहना करते हुए कहा कि जो सेवा संस्कार का रूप लेकर साधना बन जाती है वही  साधना संघ के स्वयंसेवकों की प्राणवायु है। संघ के स्वयंसेवक हमेशा अपना कर्तव्य निभाते हैं। कार्य छोटा हो या बड़ा , कार्यक्षेत्र नगर हो या वन पहाड़ी क्षेत्र , वे हमेशा निस्वार्थ भाव से सेवा में समर्पित रहते हैं। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के विकास में युवा शक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत का युवा ही 2047 के विकसित भारत की ध्वजा थामे हुए हैं। भारत का युवा अपनी गौरवशाली विरासत और संस्कृति पर गर्व करते हुए आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि आज भारत विश्व के दूसरे देशों की मदद करने में समर्थ है। वसुधैव कुटुंबकम् का मंत्र दुनिया के कोने कोने तक गूंज रहा । दुनिया के किसी भी देश जब कोई संकट आता है तो भारत उसकी सहायता के तत्पर रहा है । अभी हाल में ही म्यांमार में आए भयानक भूकंप  की त्रासदी से निपटने के लिए उसे भारत ने तत्काल ही आपरेशन ब्रह्मा के माध्यम से मदद उपलब्ध कराई। नेपाल में भी जब भूकंप ने तबाही मचाई तब भी उसे मदद  करने वाले देशों में भारत अग्रणी था। सेवा और बंधुत्व की यह भावना हमारे संस्कारों का विस्तार ही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में  उनकी सरकार द्वारा जनहित में प्रारंभ की गई स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि आम जनता तथा बुजुर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास रत है । स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में माधव नेत्रालय को उत्कृष्ट संस्थान बताते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान मानव सेवा का मंदिर है और कण कण में देवालय का प्रतीक है। संघ मुख्यालय में नरेन्द्र मोदी का यह प्रवास  संक्षिप्त भले ही रहा हो परन्तु इस प्रवास को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है । संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में विचारों का जो आदान प्रदान किया उसने संघ और सरकार के संबंधों में एक नये अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा जा रहा है और अब यह भी  तय माना जा सकता है कि निकट भविष्य में होने जा रहे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में संघ  की राय अहम साबित होगी ।