छत्तीसगढ़ की पहचान बना विशाल चर्च, एशिया में दूसरा स्थान
जशपुर|आज पूरे देश में गुड फ्राइडे मनाया जा रहा है. गुड फ्राइडे को ब्लैक फ्राइडे के तौर पर भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन कोई सेलिब्रेशन नहीं बल्कि प्रभु यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हुए चर्च में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती है. वहीं छत्तीसगढ़ के जशपुर में स्थित एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च ‘रोजरी महारानी महागिरजाघर’ में भी लोग प्रार्थना सभा में एकत्रित होने के लिए पहुंचते हैं. माना जाता है कि रोजरी महारानी महागिरजाघर एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च है. जहां 10 हजार श्रद्धालु एक साथ प्रार्थना सभा में शामिल हो सकते हैं|
जशपुर में है एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च
जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित रोजरी की महारानी महागिरजाघर जशपुर जिला ही नहीं बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं ईसाई धर्मावलंबियों के आस्था का बड़ा केंद्र है. इस चर्च के निर्माण की परिकल्पना बिशप स्तानिसलाश के द्वारा बेल्जियम के प्रसिद्ध वास्तुकार कार्डिनल जेएम कार्सि एसजे की मदद से की गई थी. इसे बनाने में करीब 17 साल लगे थे. आज भी इस चर्च की भव्यता बरकरा है. गुड फ्राइडे के दिन इस चर्च में विशेष तौर पर श्रद्धालु इक्ट्ठा होते हैं|
एक साथ 10 हजार लोग कर सकेंगे ‘गुड फ्राइडे’ की प्रार्थना
बता दें कि इस चर्च में 10 हजार से ज्यादा लोग एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं. वहीं क्रिसमस के मौके पर यहां आयोजित समारोह में हर साल देश-विदेश से चार से पांच लाख लोग पहुंचते हैं. कुनकुरी के इस चर्च की नींव 1962 मे रखी गई थी. उस समय कुनकुरी धर्मप्रांत के बिशप स्टानिसलास लकड़ा थे. इस विशालकाय भवन को एक ही बीम के सहारे खड़ा करने के लिए नींव को विशेष रूप से डिजाइन किया गया. सिर्फ इस काम में दो साल लग गए. नींव तैयार होने के बाद भवन का निर्माण 13 सालों में पूर्ण हुआ था. महागिरजाघर में सात अंक का विशेष महत्व है. यहां सात छत और सात दरवाजे है. यह जीवन के सात संस्कारों का प्रतीक माना जाता है|


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