क्या सत्ता के लिए कुछ भी करेगी भाजपा ?
क्या सत्ता के लिए कुछ भी करेगी भाजपा ?
परमेश्वर राव, प्रधान संपादक। भारत में सत्ता हथियाने के लिए पिछली सदी में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा राष्ट्रपति शासन का सहारा लिया था। दलबदल से भी परहेज नहीं किया किंतु सत्ता हथियाने की जो तकनीक भाजपा ने विकसित की है वह पूरी तरह देशी-स्वदेशी और मेक इन नागपुर है। भाजपा की उम्र 46 साल की हो गई है, सत्ता का स्वाद भाजपा नोवें दशक में चख सकी। केंद्र में भाजपा चौथी बार सत्ता में है लेकिन जिस सत्ता को भाजपा नेता अटल बिहारी बाजपेयी चिमटे से नहीं छूना चाहते थे उस सत्ता को आज के शीर्ष भाजपा नेता दांत से पकड लेते हैं। पहले दाना डालकर मछली फंसाते हैं और मौका देखकर मछली को ही दाना बना लेते हैं।चूंकि अटल बिहारी बाजपेई मेरे अपने उस शहर के हैं जहाँ मेरी शिक्षा हुई, इसलिए उनके चर्चित बयान हमेशा याद रहते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसी सत्ता को चिमटे से भी नहीं छूना चाहते थे, जो पार्टी तोड़कर, विधायकों को खरीदकर या असैद्धांतिक गठबंधन बनाकर हासिल की जाती हो। उनका मशहूर बयान संसद में आया था, जब उन पर "सत्ता का लालची" होने का आरोप लगा था। उन्होंने गरजकर कहा था-'पार्टी तोड़कर सत्ता के लिए नया गठबंधन करके अगर सत्ता हाथ में आती है, तो मैं ऐसी सत्ता को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करूंगा!" यह बयान अटल जी के सिद्धांतवादी और नैतिक राजनीति के प्रति निष्ठा को दर्शाता है। वे मानते थे कि सत्ता का खेल चलता रहेगा, सरकारें आएंगी-जाएंगी, लेकिन देश और लोकतंत्र बना रहना चाहिए।यह उद्धरण आज भी कई राजनीतिक संकटों (जैसे पार्टी बदलने या सरकार गिराने के मामलों) में वायरल होता रहता है।
आज बिहार में जिस तरह से भाजपा सत्ता के सूत्र सम्हालने के लिए जेडीयूसे सौदेबाजी कर रही है उसे देखकर लगता है कि भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह बदल गया है.आज की भाजपा 2018 में मप्र विधानसभा का चुनाव हारी तो 19 महिने की उधेडबुन के बाद भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिये कांग्रेस की सरकार में सेंध लगाकर बिना चुनाव लडे सत्ता में आ गई। महाराष्ट्र में सत्ता हथियाने के लिए भाजपा ने शिवसेना को तोडा और एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता का हिस्सा तो बन गई लेकिन भाजपा ने मौका मिलते ही एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद से बेदखल कर देवेंद्र फडनवीस को मुख्यमंत्री बना लिया। बिहार में भी भाजपा मुख्यमंत्री पद पाने के लिए नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने के साथ ही उनके बेटे को उप मुख्यमंत्री पद देने को राजी हो गई है.सत्ता हर राजनीतिक दल का अंतिम लक्ष्य होता है किंतु भाजपा की तरह सत्ता के लिए हर -अनैतिक समझौता केवल भाजपा करना जानती है. आपको याद होगा कि केंद्र में भी भाजपा अनैतिकता की बैशाखियां लगाकर पिछले दो साल से सत्ता में है। केंद्र की सत्ता न डगमगाए इसलिए भाजपा हर समझौता करने के लिए मजबूर भी है और तैयार भी है। आज की भाजपा अटल जी की भाजपा नहीं है। अटल जी की भाजपा ने अपनी ही पार्टी की तत्कालीन गुजरात सरकार को दंगों के बाद राजधर्म का पाठ पढा दिया था, किंतु आज की भाजपा मणिपुर हिंसा के बाद भी अपनी पार्टी की सरकार को राजधर्म नहीं सिखा सकी। कांग्रेस की तत्कालीन निरंकुश सरकार के बाद भाजपा से देश को बडी उम्मीद थी, मुझे भी थी. लेकिन जैसे देश की उम्मीद टूटी वैसे ही मेरी भी उम्मीद टूट गई। मुझे नहीं लगता कि भाजपा बिना सत्ता के अब एक दिन भी जिंदा रह सकेगी, साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल तो भाजपा कबकी कर चुकी अब तो सत्ता में बने रहने के लिए नये-नये तरीके ईजाद कर लिए हैं।


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क्या सत्ता के लिए कुछ भी करेगी भाजपा ?


