कोई मसाला नहीं। कोई संभावना नहीं। कोई गणित नहीं। पहले यह दो बयान पढ़िए। आज का। बेहद ताजा।- 

पटना|1. "बहुत लोगों को लगता है कि मुख्यमंत्री जी राज्यसभा जा रहे हैं। 2025 से 2030 तक बिहार में जो सरकार चलेगी, उसमें उन्हीं के मार्गदर्शन में सरकार चलेगी। कल के बैठक में उन्होंने बोला भी है। पार्टी का काम वह देखेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं वह। इस सरकार को गाइड करेंगे, जो यहां पर चलेगी। निशांत कुमार भी जदयू में कल से अपना काम शुरू करेंगे। जदयू का भविष्य तो जनता तय करती है। जनता ने 2025 में तय कर दिया। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में चुनाव हुआ। सरकार चल रही है। डिस्कशन वह सबसे करते हैं, लेकिन जो भी फैसला लेते हैं- उनका अपना होता है। 14 करोड़ बिहारियों को सम्मान से तब देखा गया, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। पूरे बिहार को लगता है कि नीतीश हैं तो वह सुरक्षित हैं। पार्टी उनके फैसले के साथ है।"

2. "जब हमारे नेता ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा ही नहीं दिया तो नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी कोई सवाल ही बेकार और बेमतलब का है। एनडीए के नेता हमारे नेता नीतीश कुमार हैं। नीतीश कुमार को जनादेश मिला है। उनका इस्तीफा नहीं हुआ है तो नई सरकार के गठन की चर्चा अभी कहां! जब समय आएगा, तब जनादेश हासिल करने वाले नीतीश कुमार तय करेंगे कि सीएम कौन होगा। नीतीश कुमार ने कुछ सोच-समझ कर राज्यसभा के लिए नामांकन किया है। हम उनके हर फैसले में उनके साथ हैं।"जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष ने कहा ऐसा पहला बयान जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का है और दूसरा प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का। आज, यानी शनिवार 7 मार्च को दिया गया यह बयान है। रविवार 8 मार्च को निशांत कुमार के जदयू में कामकाज शुरू करने के एक दिन पहले। मतलब, औपचारिक तौर पर पार्टी में आने के एक दिन पहले। 

सीएम पद पर हैं... कब तक इस्तीफा नहीं दे सकते, यह भी जानें

दोनों बयानों का भावार्थ लोग अपने हिसाब से लगा सकते हैं, क्योंकि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा जताते समय जो आधार बताया था- वह चौंकाने वाला था। बहुत अजूबा कि कोई मुख्यमंत्री सिर्फ इसलिए राज्यसभा जाने की इच्छा जताए, क्योंकि वह लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद् का सदस्य तो रहा है लेकिन देश के सर्वोच्च सदन का नहीं। राज्यसभा के नाम पर मुख्यमंत्री का पद त्यागने वाले पहले मुख्यमंत्री के रूप में खबरें भी चल चुकी हैं। लेकिन, सच्चाई यह है कि नीतीश कुमार ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। वह आज भी मुख्यमंत्री हैं। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव का परिणाम आने तक भी मुख्यमंत्री रह सकते हैं। और, 20 अप्रैल को राज्यसभा के पुराने सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने तक भी। या, शायद उसके बाद भी। मतलब, जीतने के बाद भी राज्यसभा जाकर शपथ नहीं ली, तो भी।

भाजपा को हरी झंडी मिल चुकी, लेकिन महागठबंधन दे रहा गुपचुप ऑफर

नीतीश कुमार 16 मार्च को अगर राज्यसभा के लिए चुन लिए जाते हैं और तब वह इस्तीफा देते हैं तो 15 मार्च से 14 अप्रैल तक चलने वाला खरमास नई सरकार के गठन का रास्ता रोकेगा। यह वक्त काफी होगा कुछ नया खेला करने के लिए। इसलिए, भाजपा अपना सीएम तय कर जल्द से जल्द नीतीश को इस्तीफे के लिए तैयार करना चाहेगी। शायद 15 मार्च के पहले। यही कारण है कि भाजपा सारे काम तेजी से कर रही है। खासकर तब, जबकि वह देख रही है कि चुनाव परिणाम के महज तीन महीने बाद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की बात से गलत मैसेज गया है। इसके साथ ही वह यह भी देख रही है कि नीतीश कुमार ने भले ही भाजपा को अपनी ओर से हरी झंडी दे दी है, लेकिन महागठबंधन लगातार किसी-न-किसी रूप में उन तक ऑफर पहुंचा रहा है। आज भी तेजस्वी यादव ने कहा कि 25 से 30 के लिए जनादेश अगर नीतीश कुमार को मिला है तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाना बड़ी साजिश है, जिसका अंदेशा पहले से था। 

भाजपाई सीएम की तैयारी के बीच केंद्र के गणित पर भी लोगों की नजर

भाजपा बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री देने जा रही है। इस चर्चा और भाजपा की अपनी तैयारियों के बीच कई नाम दौड़ में हैं। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया गया है। ऐसे राजनीतिक गहमागहमी के माहौल में लोग केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के गणित पर भी चर्चा कर रहे हैं। जब 2024 चुनाव के बाद केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की वापसी हुई थी तो नीतीश कुमार को किंगमेकर कहा गया था। लोग उस गणित को याद करना चाह रहे हैं। इसलिए, यह बताना जरूरी है कि सिर्फ नीतीश कुमार के हाथ खींचने से केंद्र की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 272 सांसद बहुमत के लिए चाहिए और नीतीश कुमार के 12 एमपी समर्थन वापस भी ले लें, तब भी (292-12=280) 280 की संख्या के साथ एनडीए की सरकार केंद्र में चलती रहेगी।