फेड गवर्नर को हटाने में असफल रहे ट्रंप, न्यायालय ने दिया बड़ा फैसला
वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यकारी शक्तियों और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के बीच चल रहे टकराव में देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक कड़े मुकाबले वाले 5-4 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसके जरिए फेडरल रिजर्व बोर्ड की गवर्नर लिसा कुक को उनके पद से हटाने का प्रयास किया जा रहा था। साल 1913 में फेडरल रिजर्व की स्थापना के बाद के इतिहास में यह पहला ऐसा मौका है, जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय बैंक के किसी शीर्ष अधिकारी को बर्खास्त करने की कोशिश को सर्वोच्च न्यायालय ने सीधे तौर पर नाकाम कर दिया हो।
न्यायालय ने पलटी ट्रंप सरकार की दलील
नौ सदस्यीय खंडपीठ ने ट्रंप प्रशासन के उस अनुरोध को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें निचली अदालत के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी जिसने लिसा कुक की तत्काल बर्खास्तगी पर रोक लगाई थी। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने फेड की स्वतंत्रता पर लगातार सवाल उठाए हैं और अपनी प्रशासनिक शक्तियों के दायरे को बढ़ाने की कोशिश की है। लिसा कुक फेडरल रिजर्व बोर्ड के उन सात सदस्यों में शामिल हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका की मौद्रिक नीतियां निर्धारित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्हें साल 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नियुक्त किया था और उनका आधिकारिक कार्यकाल साल 2038 तक सुरक्षित है।
ट्रंप की सोशल मीडिया पर नई चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट से लगे इस बड़े कानूनी झटके के बाद भी राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अदालत के इस फैसले को केवल एक प्रक्रियात्मक निर्णय करार दिया और लिसा कुक के खिलाफ आगे भी कदम उठाने का संकल्प दोहराया। ट्रंप ने लिखा कि वे जल्द ही उचित कानूनी रास्ता अपनाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश के महत्वपूर्ण वित्तीय फैसले लेने वाली संस्थाओं में कोई ऐसा व्यक्ति न रहे जिस पर आरोप हों। राष्ट्रपति ने कुक पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि ये आरोप अब तक किसी भी कानूनी मंच पर साबित नहीं हो सके हैं।
आरोपों के पीछे की असली वजह
फेडरल रिजर्व की पहली अश्वेत महिला गवर्नर लिसा कुक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका साफ कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप मौद्रिक नीतियों पर उनके साथ चल रहे वैचारिक मतभेदों के कारण उन्हें पद से हटाना चाहते हैं और इन पुराने आरोपों को महज एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। गौरतलब है कि ट्रंप ने 25 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया पर एक बर्खास्तगी पत्र साझा कर कुक को हटाने की मुहिम शुरू की थी। इसके बाद जिला न्यायाधीश जिया कॉब ने अपने फैसले में कहा था कि बिना किसी पूर्व नोटिस या निष्पक्ष सुनवाई के इस तरह का कदम उठाना तय कानूनी प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है। न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन आरोपों का जिक्र किया जा रहा है, वे कुक के पद संभालने से भी पहले के हैं और फेडरल रिजर्व अधिनियम के तहत किसी अधिकारी को हटाने का ठोस कारण नहीं बनते। इस फैसले को बाद में कोलंबिया सर्किट अपील अदालत और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।
फेडरल रिजर्व पर बढ़ता नियंत्रण
वैश्विक अर्थव्यवस्था की ब्याज दरें तय करने वाले दुनिया के सबसे ताकतवर केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व पर अपनी पकड़ मजबूत करना ट्रंप की वापसी के बाद से ही उनके एजेंडे में रहा है। पूर्व फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल का आठ साल का कार्यकाल इसी वर्ष 15 मई को समाप्त हुआ था। उनकी विदाई के बाद ट्रंप ने अपनी पसंद के अधिकारी केविन वॉर्श को इस पद के लिए नामित किया था, जिन्हें 13 मई को अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद वॉर्श ने 22 मई को नए फेड चेयरमैन के रूप में अपनी शपथ ली थी, लेकिन लिसा कुक के मामले में आए अदालत के इस नए फैसले ने ट्रंप की इस राह में एक बड़ी कानूनी दीवार खड़ी कर दी है।


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