परमेश्वर राव, प्रधान संपादक

राजा नँगा है 

राजा और उसके दरबारी भक्तों को छोड़ कर सब लोगों को दिख रहा है कि 'राजा और उसका सिस्टम' दोनों नंगे हैं राजा को तथाकथित दिव्य वस्त्र पहनाए गए थे। कहा गया था कि ये कोई साधारण कपड़ा नहीं है। इसे वही देख सकता है जो सच्चा और ईमानदार हो। राजा आईने के सामने खड़ा था। उसे खुद अपना ढीला, लटका हुआ, नंगा शरीर दिख रहा था। उसे दिख रहा था कि उसके तन पर कुछ नहीं है। लेकिन वो ये कैसे मान लेता कि वो झूठा और भ्रष्ट है ? तो उसने खुद को समझाया कि नहीं, वस्त्र हैं। दिव्य हैं, अलौकिक हैं। और फिर वो निकल पड़ा साम्राज्य घूमने।  दरबारियों और भक्तों सहित पूरी प्रजा को दिख रहा था, राजा नंगा है। लेकिन सबने कहा, “कितने शानदार वस्त्र हैं ... दिव्य, अलौकिक।”

सच सबको दिख रहा था। फिर भी सब झूठ बोल रहे थे। क्योंकि सच बोलने में खतरा था

कोई कैसे कह देता सच ? इस देश में सच से ऊपर नौकरी है, कुर्सी है, पोस्टिंग है, ट्रांसफर है, बच्चे की फीस है, बैंक बैलेंस है। और उससे भी ऊपर ED है, CBI है, इनकम टैक्स है, पुलिस है, कोर्ट कचहरी है। वरना संजीव भट्ट, उमर खालिद, जज लोया, गौरी लंकेश, स्टेन स्वामी आदि याद हैं ? कई साल राजा ऐसे ही घूमता रहा। फिर एक बच्चा आया। उसने राजा को देखा। और हंस पड़ा। राजा चौंका। “क्यों हंस रहे हो?” “क्योंकि तुम इतने बड़े होकर भी इस तरह नंगे सड़कों पर घूम रहे हो।”

एक वाक्य। और पूरी व्यवस्था कांप गई

चापलूस भक्त, दरबारी सब सकते में आ गए। ये एक पुरानी कहानी थी। बच्चे ने टोका था, सच कह दिया था- राजा नंगा है।  एक बार फिर एक बच्चा - नाम वेदांत श्रीवास्तव भारत की शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ा हो गया ! उसने कहा सिस्टम नंगा है ! सालों से शिकायतें आती रहीं। कोई कहता पेपर लीक हुआ है। कोई कहता नंबर गलत आए। कोई कहता कॉपी जांचने में गड़बड़ी हुई। कोई कहता सिस्टम में भ्रष्टाचार है। लेकिन हर बार दरबारियों ने कहा, चुप रहो। यहां सब दिव्य है। अलौकिक है। पवित्र है। यहां गलती नहीं होती।

 लोग चुप हो गए

क्योंकि इस देश में मीडिया और भक्तों ने मिलकर राजा का नाम भगवान से ऊपर रख दिया है। यहां बच्चे गलत हो सकते हैं, राजा और उसका सिस्टम नहीं। यहां छात्र झूठा हो सकता है, राजा और उसका सिस्टम नहीं। यहां युवाओं का भविष्य बर्बाद हो सकता है, लेकिन राजा से सवाल नहीं हो सकते।

लेकिन इस बार वो बच्चा अड़ गया

उस बच्चे ने कहा, “बोर्ड की परीक्षा में मेरे नंबर गलत हैं। इतने कम नंबर आ ही नहीं सकते।" सबने उसे लताड़ा। कम पढ़े, कम नंबर आए। अब सिस्टम को भ्रष्ट कहते हो ? बच्चा अड़ गया। ये मेरे नंबर नहीं हैं। हो ही नहीं सकते हैं। सिस्टम नंगा है, सिस्टम चलाने वाले नंगे हैं, राजा नंगा है !! आखिर सीबीएसई को उसकी कापी निकालनी पड़ी। उसे कापी देनी पड़ी। कॉपी देखकर बच्चा हंसा - “ये मेरी कापी ही नहीं है। मेरी कापी नहीं, तो मेरे नंबर कैसे ?” ये सुनते ही सिस्टम उस पर टूट पड़ा। दरबारी टूट पड़े - “ये कापी तेरी नहीं? झूठे। बोर्ड में किसी की कापी बदलती है? इतनी शानदार व्यवस्था को तुम भ्रष्ट बता रहे हो ? तुम देशद्रोही हो, अर्बन नक्सल हो, टुकड़े टुकड़े गैंग हो, पाकिस्तानी हो !!

बच्चा अड़ा रहा - “सिस्टम नंगा है”

राजा का सिस्टम, दरबारी और भक्त कहते रहे- "तुम झूठे हो। तुम्हें राजा की दिव्य व्यवस्था नहीं दिखती। तुम चिल्लाते रहो, क्या फर्क पड़ता है? हमें तो सिस्टम के दिव्य वस्त्र ही दिख रहे हैं।" एक बात नोट कर लीजिए, जब सच अड़ जाता है, तब साम्राज्य टूटते हैं। हुआ क्या? सीबीएसई को सामने आना पड़ा। मानना पड़ा कि सिस्टम नंगा है। कापी बदल गई है। भारी चूक हुई थी। यानी जिस चीज को सालों से दिव्य बताया जा रहा था, वो नंगी थी, भ्रष्ट थी। अब सवाल ये है कि अब होगा क्या? क्या कोई मंत्री बोलेगा कि नैतिक जिम्मेदारी उसकी है?

क्या कोई इस्तीफा देगा?

क्या कोई जेल जाएगा? या फिर कुछ दिन के बाद कहा जाएगा,  कुछ हुआ ही नहीं। बात इतनी छोटी नहीं है। बारहवीं बोर्ड की परीक्षा सिर्फ परीक्षा नहीं होती। यही देश की रीढ़ है। यही तय करती है कि कौन डॉक्टर बनेगा, कौन इंजीनियर बनेगा, कौन विश्वविद्यालय जाएगा, किसका भविष्य खुलेगा और किसका बंद हो जाएगा। अगर यहां कॉपी बदली जा सकती है, तो फिर इस देश में क्या सुरक्षित है? अगर यहां सच दबाया जा सकता है, तो फिर संविधान की किताबें सिर्फ सजावट हैं। अगर एक बच्चे को अपनी ही कॉपी साबित करने के लिए खुद खड़े होना पड़ा, तो समझ लीजिए कि शिक्षा व्यवस्था नहीं, पूरा तंत्र नंगा हो चुका है। वैसे तो चेहरे बदलने से सड़ांध नहीं रुकती। लेकिन अगर इस देश में सचमुच जवाबदेही बची है, अगर सत्ता सचमुच खुद को दिव्य कहलवाना चाहती है, तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री को बर्खास्त किया जाना चाहिए। सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों पर एफआईआर होनी चाहिए। जेल भेजा जाना चाहिए। क्योंकि ये मामूली प्रशासनिक गलती नहीं है। ये करोड़ों बच्चों के भरोसे की हत्या है। वेदांत के बाद अब कई और बच्चे भी बोल रहे हैं कि किसी और की कॉपी जांच दी, खाली पेज लगा दिये, ब्लर स्कैन कर दिए आदि आदि। देश मेडिकल परीक्षा का पेपर लीक सह गया। भर्ती घोटाले सह गया। रिजल्ट घोटाले सह गया। लेकिन अगर अब बोर्ड परीक्षा में कापी बदल कर किसी को पास, किसी को फेल किया जाए तो फिर आने वाली पीढ़ियां किताबों से भरोसा खो देंगी। जिस देश के बच्चे किताबों से भरोसा खो दें, उस देश का भविष्य की नहीं बचा सकता। राजा आज भी सड़क पर घूम रहा है। दरबारी आज भी ताली बजा रहे हैं। लेकिन बाकी सबको दिख रहा है - राजा और उसका सिस्टम नंगा है।