डॉक्टर (प्रोफेसर) संजय बाजपेयी

अंबेडकरजी से हमें कोई आपत्ति नहीं, बेशक आज से साठ सत्तर साल पहले भेदभाव होता था। यह कर्म के  कारण जातिगत हो गया। यदि कोई व्यक्ति ऐसा कार्य कर रहा है जिससे संक्रमण और बीमारी का खतरा है उसे कोई भी छूना पंसद नहीं करेगा, जैसे पहले मरे हुए जानवरों को उठाना, उनकी चमड़ी निकालना, घर घर जाकर मल उठाना वगैरह। आज भी कुछ ऐसे कार्य होतें हैं और करने के बाद स्वयं को साफ सुथरा करके चलते हैं, अभी तो स्कूलों,कालेज, बाजार, बस, ट्रेन, जहाज हर जगह सभी साथ चलते और कौन किसकी जाति पूंछता है। यहाँ तक कि होटल में साथ में खाना खाते हैं, यह कोई जानने की कोशिश ही नहीं करता कि बनाने वाला कौन है, परोसने वाला कौन है और बाजू में बैठने वाला कौन है। दिमाग में सिर्फ एक चीज रहती है कि सफाई है की नहीं, खाना अच्छा हो और परोसने वाला साफ हो। यदि मैला कुचेला आदमी खाना लेकर आयेगा तो कोई भी नहीं खायेगा। हम अपने घर से उदाहरण लें, जब हम अपने घर की टायलेट शीट साफ करते हैं तब उसके पश्चात सीधे नहाने जाते हैं बिना कुछ छुये, कारण सिर्फ साफ सफाई। मैं भी समानता का पुरजोर समर्थक हूँ। सभी लोग बराबर हैं, सभी के लिए एक समान कानून होना चाहिए, कहीं भी कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। कठोर कानून बनाइये और जो भी गलत करे उसे सख्त सजा दीजिए।  परन्तु अंबेडकरजी ने और कुछ नेताओं ने समानता लाने की जगह और गहरी खाई पैदा कर दी देशवासियों के बीच। जहाँ पर पढ़ने लिखने की सुविधा नहीं थी वहाँ पर अच्छे स्कूल, कॉलेज बनवाते। होशियार और संस्कारवान शिक्षक रखते जिससे वह बच्चे एक शिक्षित नागरिक बनकर देश को आगे बढ़ाने में सहयोग करते। परन्तु इन लोगों ने ऐसी व्यवस्था तैयार की जिससे देश का और बेडागर्क हो गया और हो रहा है। शिक्षा, नौकरी, पदोन्नित हर जगह अन्याय और असमानता। एक स्कूल, एक शिक्षक, एक सी सुविधा पर फीस अलग अलग  वो भी जाति के नाम पर, धिक्कार है। जिसके कम नंबर, कम योग्य - नौकरी वा पदोन्नित उसी को। वह क्या काम करेगा। सुविधायें जरूरतमंद को दो और नौकरी एवम उच्च शिक्षा सिर्फ योग्यता के आधार पर तभी हम एक स्वस्थ समाज की स्थापना कर पायेंगे और देश को विश्व गुरु की ओर अग्रसित कर पायेंगे। माइनस चालीस नंबर वाला क्या इलाज करेगा यह समझाने की जरूरत नहीं और जो लोग ऐसी व्यवस्था का समर्थन करते हैं क्या वे लोग अपने बच्चों, मां, बाप का इलाज ऐसे डॉक्टर से करवायेंगे। जब अयोग्य व्यक्ति भवन निर्माण, सड़क और पुल निर्माण करेगा तो आपकी जिंदगी का क्या होगा। रोज समाचारपत्रों में आता है, बताने की जरूरत नहीं। मैं अपनी बात फिर दोहराता हूँ, मैं समानता का पक्षधर हूँ किसी के खिलाफ नहीं।