चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में जारी राजनीतिक गतिरोध अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सरकार गठन में हो रही देरी को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) ने केंद्र और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। शरद पवार गुट ने सवाल उठाया है कि क्या बीजेपी तमिलनाडु में अपनी करारी हार को स्वीकार नहीं कर पा रही है और सत्ता के लिए संवैधानिक शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।


"सबसे बड़े दल को मिले सरकार बनाने का न्योता"

एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने एक आधिकारिक बयान जारी कर राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) 238 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। विजय के नेतृत्व वाली टीवीके को कांग्रेस की 5 सीटों का समर्थन भी हासिल है और वे अन्य दलों के साथ गठबंधन की प्रक्रिया में हैं। क्रास्टो के अनुसार, राज्यपाल को निष्पक्षता दिखाते हुए सबसे बड़े दल के नेता विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।


कर्नाटक और महाराष्ट्र पैटर्न की याद दिलाई

पार्टी के महासचिव रोहित पवार ने इस स्थिति की तुलना साल 2018 के कर्नाटक घटनाक्रम से की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्नाटक में बहुमत न होने के बावजूद बीजेपी को 'सबसे बड़ा दल' होने के नाते सरकार बनाने का मौका दिया गया था, लेकिन तमिलनाडु में टीवीके के साथ वैसा व्यवहार नहीं हो रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि क्या तमिलनाडु में भी महाराष्ट्र, गोवा या दिल्ली की तरह सत्ता के समीकरणों को प्रभावित करने वाला 'पैटर्न' अपनाने की कोशिश की जा रही है।


क्या है तमिलनाडु का मौजूदा समीकरण?

4 मई को आए चुनावी नतीजों ने राज्य में एक दिलचस्प स्थिति पैदा कर दी है:

  • टीवीके (TVK): 108 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)

  • बहुमत का आंकड़ा: 118 सीटें

  • समर्थन: कांग्रेस (5 सीटें) पहले ही समर्थन का ऐलान कर चुकी है।