मणिपुर में शांति प्रक्रिया तेज, लोगों ने जमा कराए गोला-बारूद और हथियार
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद हथियारों का सरेंडर जारी है. बुधवार को 6 जिलों के लोगों अपनी इक्छा से हथियार जमा कराए हैं. पुलिस ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मणिपुर के 6 जिले में सुरक्षाबलों को कुल 104 हथियार और गोला-बारूद सौंपे गए हैं. सबसे अधिक हथियार इम्फाल पश्चिम जिले में सौंपे गए. इनमें 12 कार्बाइन मशीन गन और मैगजीन भी शामिल हैं. राज्पाल के आदेश के बाद कई हथियार सरेंडर हो चुके हैं.
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सात दिन के भीतर स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने की बात कही थी. उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस अवधि के दौरान हथियार छोड़ने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अवधि समाप्त होने के बाद सुरक्षा बल कार्रवाई करेंगे.
13 फरवरी को मणिपुर में लगा था राष्ट्रपति शासन
मई 2023 से इम्फाल घाटी स्थित मैतेई और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं. हजारों लोग बेघर हो गए हैं. मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद पूर्वोत्तर राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई थी.केंद्र सरकार ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था. गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, को निलंबित कर दिया गया है.
9 फरवरी को CM एन बीरेन ने इस्तीफा दिया था
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को अपना इस्तीफा गवर्नर को सौंपा था. गवर्नर अजय कुमार भल्ला ने इस्तीफा स्वीकार किया. बीरेन सिंह पर राज्य में 21 महीने से जारी हिंसा के चलते काफी दबाव था. विपक्षी पार्टियां भी लगातार NDA से इस मुद्दे पर सवाल पूछ रही थीं. इस्तीफे का फैसला लेने से पहले बीरेन सिंह ने रविवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी, जिसके बाद ही इस्तीफा दिया गया था.