सावन में ओंकारेश्वर की नई परंपरा, महाआरती और दीपदान से शुरू हुआ उत्सव
ओंकारेश्वर। सनातन धर्म में श्रावण मास की अति विशिष्ट धार्मिक मान्यताएं हैं और इन दिनों बाबा भोले के भक्त उनका आशीर्वाद लेने शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। वहीं ज्योतिर्लिंग मंदिरों में तो यह भीड़ एक जन सैलाब की तरह नजर आती है। इसी के चलते मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक और पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में शुक्रवार से शुरू हो रहे श्रावण मास 2025 की तैयारियों को लेकर मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन के द्वारा महत्वपूर्ण बैठक कर विशेष तैयारियां की गई हैं। बता दें कि इस वर्ष श्रावण मास 14 जुलाई से प्रारंभ होकर 28 अगस्त 2025 तक चलेगा। इस दौरान कुल 6 सोमवार पड़ेंगे। श्रावण के दिनों में ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंचने वाली भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने एक विशेष कार्य योजना भी बनाई है।
सावन माह के पहले दिन महाआरती
मध्यप्रदेश और विशेषकर निमाड़ क्षेत्र की जीवनदायनी मां नर्मदा के तट पर बसी ओंकारेश्वर तीर्थनगरी में स्थित अतिप्राचीन कोटितीर्थ घाट पर आज सावन माह के पहले दिन से जिला प्रशासन एवं ओंकारेश्वर मंदिर संस्थान द्वारा महाआरती का शुभारंभ किया जा रहा है। इस भव्य आयोजन के दौरान वैदिक आचार्यजन विधि विधान से भव्यता के साथ मां नर्मदा का पूजन, अभिषेक एवं महाआरती करेंगे।
आटे के बने दीपक का होगा उपयोग
खंडवा जिला प्रशासन एवं मंदिर संस्थान के सहयोग से आरती स्थल पर भव्यता भी दी जाएगी, जिसकी सभी तैयारियां सम्पूर्ण हो चुकी है, ताकि यहां देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले तीर्थयात्री हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे पवित्र स्थानों की तरह ही ओंकारेश्वर नगरी में भी मां नर्मदा के तट पर होने वाली महाआरती में बड़ी संख्या में शामिल हो सकें। साथ ही यह महाआरती देश दुनिया में अलग पहचान बनाएं। बता दें कि मुख्य आरती स्थल कोटीतीर्थ घाट रहेगा। यहां होने वाले दीपदान के लिए आटे के बने दीपक का उपयोग भी किया जाएगा।


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