बाढ़ से तबाही के बाद भी नहीं मिली पूरी राहत, लोगों ने उठाई ये मांग
पठानकोट: मानसून का आगमन होते ही सीमावर्ती इलाकों में नेताओं के दौरों का सिलसिला तेज हो गया है, लेकिन पिछले वर्ष अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ के पीड़ितों को एक साल बीत जाने के बाद भी ठोस राहत नहीं मिल सकी है। केंद्र और राज्य सरकार की अनदेखी के चलते बाढ़ पीड़ितों के घाव आज भी हरे हैं। पठानकोट का सीमावर्ती इलाका कोलियां अड्डा और माधोपुर हेडवर्क्स इस समय राजनीतिक अखाड़ा बने हुए हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेता एक-दूसरे पर जमकर कीचड़ उछाल रहे हैं। जनता अब इन राजनेताओं से सवाल कर रही है कि आखिर उन्हें कब तक छला जाएगा, क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा और स्थायी समाधान पर बात करने के लिए तैयार नहीं है।
भाजपा का राज्य सरकार पर तीखा हमला और केंद्रीय रिपोर्ट की चेतावनी
क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्वेत मलिक ने कोलियां अड्डा में स्थानीय स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान भोआ हलके की पूर्व विधायक सीमा देवी ने उन्हें बाढ़ से हुए भारी नुकसान और प्रशासनिक लापरवाही से अवगत कराया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने पंजाब सरकार को कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ बताते हुए भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत और विकास कार्यों के लिए जारी किए गए 450 करोड़ रुपये का सही इस्तेमाल नहीं हुआ, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी जाएगी।
आम आदमी पार्टी का पलटवार और केंद्र की नीतियों पर सवाल
भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने माधोपुर हेडवर्क्स का दौरा किया और विपक्षी दल पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और भाजपा का असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है। कैबिनेट मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल शिक्षा माफिया को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे देश के लाखों-करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार देश में पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं तक आयोजित कराने में नाकाम रही है, उसे दूसरों पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।
मंत्रियों का दौरा और विपक्षी दलों की खिंचाई
इससे पहले पंजाब के जल संसाधन मंत्री वरिंदर कुमार गोयल ने भी माधोपुर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की थी। अपने दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा को जनता की विरोधी जमात करार दिया और साथ ही कांग्रेस पार्टी पर भी तीखे निशाने साधे। हालांकि, मंत्रियों और बड़े नेताओं की इस बयानबाज़ी के बीच जमीनी हकीकत में कोई सुधार देखने को नहीं मिला है। हर दल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड़ने में लगा हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
बाढ़ पीड़ितों का छलकता दर्द और नई आपदा की आशंका
राजनीतिक बयानबाजी के बीच स्थानीय बाढ़ पीड़ित रोशन लाल और सुखविंदर सिंह ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि राजनेता केवल अपना वोट बैंक साधने के लिए इन इलाकों का चक्कर लगाते हैं। त्रासदी के पूरे एक साल गुजर जाने के बाद भी प्रभावित लोग सरकारी मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अब जब नए मानसूनी सीजन के साथ फिर से बाढ़ की आशंका मंडराने लगी है, तो बिना किसी सुरक्षा इंतज़ाम के ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित और खौफजदा हैं।


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