मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की कार्रवाई से हड़कंप, अवैध फैक्ट्रियों का पर्दाफाश
चौमूं (जयपुर)। राजस्थान के कृषि महकमे और नकली बीज बनाने वाले माफियाओं के बीच उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने बिना किसी तामझाम के एक 'फूड इंस्पेक्टर' के अंदाज में चौमूं के रीको इंडस्ट्रियल एरिया स्थित सिल्वर पार्क में औचक छापेमारी की। यहाँ 'एग्रो जेनिक्स क्रॉप साइंस' और 'जीएम एग्रो इंडस्ट्रीज' नाम की दो अवैध फैक्ट्रियों के गोदामों पर अचानक की गई इस कार्रवाई ने बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। ये कंपनियां सीकर की प्रतिष्ठित फर्म 'श्री बालाजी एग्रो' के नाम और नकली लेबल का गलत इस्तेमाल कर घटिया व अमानक मूंगफली बीजों की री-पैकेजिंग के काले कारोबार में लिप्त थीं।
फैक्ट्रियों में मिला करोड़ों का जखीरा, देखकर अधिकारी भी रह गए दंग
जब कृषि मंत्री पुलिस बल और विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ रिहायशी और इंडस्ट्रियल गोदाम के भीतर पहुंचे, तो वहाँ का संगठित ढांचा देखकर सभी हैरान रह गए। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अवैध सामान जब्त कर मशीनों को सील कर दिया है, जिसकी सूची इस प्रकार है:
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60 लाख खाली बोरियां: नामी कंपनियों से हूबहू मिलती-जुलती करीब 60 लाख खाली बोरियां पैकेजिंग के लिए डंप मिलीं।
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2 लाख साबुत मूंगफली बोरियां: खुले बाजार से सस्ते दामों पर खरीदी गई मूंगफली से भरी करीब दो लाख बोरियां बरामद हुईं।
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हाईटेक मशीनें: छिलके अलग करने वाली आधुनिक मशीनें और दानों को ब्रांडेड बैग्स में पैक करने वाली स्वचालित सिलाई मशीनें चौबीसों घंटे काम कर रही थीं।
सरकारी रिसर्च और किसानों के भरोसे पर चल रहा था डाका
यह गिरोह राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI), दुर्गापुरा (जयपुर) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई सबसे लोकप्रिय और उन्नत किस्म 'RG-510' (किसान-510) के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहा था। इसके अलावा 'SG-551' और 'RG-578' जैसी प्रमाणित सरकारी किस्मों के नकली लेबल भी धड़ल्ले से छापे जा रहे थे। माफिया बाजार से बेहद सस्ती और खाने वाली साधारण मूंगफली खरीदकर लाते थे, मशीनों से दाने निकालकर उन्हें चमकीले सरकारी बैग्स में पैक करते और किसानों को 4 से 5 गुना ऊंचे दामों पर 'प्रमाणित बीज' कहकर बेच देते थे।
'एफ्लाटॉक्सिन' का खतरा: फसल के लिए तबाही, इंसानों के लिए कैंसर का कारण
कृषि विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा लिए गए सैंपल्स की जांच में एक बेहद डरावना सच सामने आया है। री-पैकेजिंग के लिए रखी गई इस मूंगफली में 'एफ्लाटॉक्सिन' (Aflatoxin) नाम का बेहद जहरीला फंगस पाया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके दो बेहद घातक परिणाम होते हैं:
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खेती पूरी तरह चौपट: इस दूषित बीज को बोने से अंकुरण के समय ही पौधे सड़ जाते, जिससे फसल की पैदावार 80% तक गिर जाती और किसान कर्ज के जाल में फंस जाता।
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लीवर कैंसर का खतरा: चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, इस फंगस से संक्रमित मूंगफली का सेवन करने से इंसानों और मवेशियों का लीवर डैमेज हो जाता है। यह इंसानी शरीर में लीवर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का मुख्य कारण है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख को बट्टा और प्रदेशव्यापी सर्जिकल स्ट्राइक
कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि इस नकली कारोबार के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य की साख खराब हुई है। कभी इंडोनेशिया, मलेशिया और यूरोपीय देशों में निर्यात होने वाली राजस्थान की मूंगफली पर इसी 'एफ्लाटॉक्सिन' फंगस के कारण प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे हमारे ईमानदार किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ।
चौमूं के गोदाम में मिले दस्तावेजों के आधार पर मंत्री ने तुरंत लाइव निर्देश जारी किए, जिसके बाद प्रदेश के 4 बड़े संभागों में कृषि विभाग ने एक साथ सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है:
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जोधपुर और बीकानेर: इन संभागों की अनाज मंडियों और निजी बीज गोदामों पर उड़नदस्तों ने छापेमारी की, क्योंकि चौमूं से नकली बीज की बड़ी खेप यहीं भेजी जानी थी।
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सीकर और चूरू: शेखावाटी के इन जिलों में 'श्री बालाजी एग्रो' के फर्जी नेटवर्क से जुड़े डीलरों के ठिकानों पर दबिश देकर संदिग्ध सैंपल्स को जांच के लिए लैब भेजा गया है।


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