जयपुर ट्रेलर दुर्घटना मामले में बड़ा कदम, जांच के लिए बनाई गई कमेटी
जयपुर। राजधानी के श्याम नगर थाना इलाके के तहत आने वाले 200 फीट बाईपास पर कमला नेहरू नगर में बीते दिनों हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले सड़क हादसे को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रेलर द्वारा फुटपाथ पर सो रहे मासूम परिवार को कुचलने की इस घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक महिला जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। इस दर्दनाक वाकये के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया है और जिला कलक्टर संदेश नायक ने मामले की उच्च स्तरीय पड़ताल के लिए एक सात सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन कर दिया है।
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अगुवाई में काम करेगी उच्च स्तरीय टीम
इस नवगठित जांच समिति की कमान अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (शहर-दक्षिण) को सौंपी गई है, जिन्हें इस पूरी जांच का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके साथ समन्वय और तकनीकी सहयोग के लिए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात-दक्षिण) को इस समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। इस उच्च स्तरीय टीम में शहर के परिवहन, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम, जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के शीर्ष अधिकारियों और परियोजना निदेशकों को बतौर सदस्य शामिल किया गया है ताकि दुर्घटना के हर तकनीकी पहलू को परखा जा सके।
हादसे के असली कारणों का पता लगाने और रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा तय
जिला प्रशासन ने इस विशेष समिति को तुरंत प्रभाव से दुर्घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के कड़े निर्देश दिए हैं। समिति न केवल इस बात का पता लगाएगी कि यह हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, बल्कि राहत एवं बचाव कार्य के दौरान प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जो कमियां या चुनौतियां सामने आईं, उनका भी आकलन करेगी। जिला कलक्टर ने इस पूरी जांच प्रक्रिया को समयबद्ध करते हुए निर्देश दिया है कि समिति सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर मात्र पांच कार्यदिवसों के भीतर अपनी विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट और सुरक्षात्मक सुझाव प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करे, जिसके आधार पर दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
ब्लैक स्पॉट बनी हीरापुरा पुलिया और डिवाइडर की बड़ी खामी
स्थानीय स्तर पर और शुरुआती जांच में इस खौफनाक हादसे की जो सबसे बड़ी वजह सामने आई है, वह बुनियादी ढांचे की एक गंभीर लापरवाही है। दरअसल, हीरापुरा पुलिया से लेकर होटल हाईवे किंग तक लगभग 100 मीटर के दायरे में मुख्य सड़क पर कोई डिवाइडर ही मौजूद नहीं है। इस बड़ी चूक के कारण पुलिया से तेज गति में उतरने वाले भारी वाहन बिना किसी नियम के अचानक और गलत तरीके से यू-टर्न ले लेते हैं, जिससे मुख्य हाईवे, सर्विस लेन और चौराहे की तरफ जाने वाला भारी ट्रैफिक आपस में उलझ जाता है और हर पल जानलेवा दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है।
चेतावनी बोर्ड के भरोसे छोड़ी सुरक्षा और ट्रैफिक पुलिस की अगली रणनीति
सुरक्षा के लिहाज से इस बेहद संवेदनशील हिस्से पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए केवल एक साधारण चेतावनी बोर्ड टांग दिया गया है, जो रात के अंधेरे में तेज रफ्तार ड्राइवरों को दिखाई भी नहीं देता। यहां गलत यू-टर्न को रोकने के लिए न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग की गई है, न ही पर्याप्त रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टिव संकेतक या ब्लिंकिंग लाइटें लगाई गई हैं। इस खतरनाक ढिलाई पर डीसीपी ट्रैफिक योगेश गोयल ने स्पष्ट किया है कि करीब 100 मीटर का यह डिवाइडर रहित हिस्सा यातायात के लिए नासूर बन चुका है और इसे दुरुस्त कराने के लिए


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