लखनऊ|सार्वजनिक क्षेत्र के 27 उद्यम राज्य सरकार के लिए बोझ बन गए हैं। इन उपक्रमों का वित्त वर्ष 21-22 और 22-23 (एक को छोड़कर) में नुकसान 32,393 करोड़ रुपये से ज्यादा था। इनमें से अकेले सात निगमों ने 32,202 करोड़ रुपये से ज्यादा की चोट पहुंचाई। यानी कुल नुकसान में इन सात निगमों का योगदान 99 फीसदी से ज्यादा है।कुल नुकसान में 45 फीसदी योगदान अकेले उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन का है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की मार्च 2023 तक जारी रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। शुक्रवार को विधान मंडल के दोनों सदनों के पटल पर राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर सीएजी रिपोर्ट रखी गई।

कुल 113 राज्य सार्वजनिक क्षेत्र में 41 निष्क्रिय

कुल 113 निगमों में से 86 सरकारी कंपनी, 21 सरकार दवारा नियंत्रित और 6 सांविधिक निगम। इन 113 में से 72 क्रियाशील और 41 निष्क्रिय हैं। 13 की तालाबंदी हो चुकी है। 72 क्रियाशील निगमों में से लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड, आगरा-मथुरा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड, वाराणसी सिटी ट्रांसपोर्ट और उत्तर प्रदेश राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास निगम ने रिपोर्ट ही नहीं दी। 68 क्रियाशील निगम (चार को छोडकर, जिन्होंने अपने वित्तीय विवरण प्रस्तुत नहीं किये थे) का टर्नओवर ( 52,696.60 करोड) था। वर्ष 2022-23 के लिए उतर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 4.10 प्रतिशत था।

100 करोड़ से ज्यादा फायदे वाले सार्वजनिक निगम

पश्चिमांचल विद्युत निगम-991 करोड़
उप्र जल विद्युत निगम-275 करोड़
उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम-  235 करोड़
उप्र राज्य भंडारण निगम-  165 करोड़
उप्र आवास एवं विकास परिषद-  144 करोड़
उप्र राजकीय निर्माण निगम-   120 करोड़
 
100 करोड़ से ज्यादा नुकसान वाले सार्वजनिक निगम

उप्र पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन - 556 करोड़
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम - 6610 करोड़
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम - 4819 करोड़
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम -5073 करोड़
उप्र पावर कारपोरेशन लिमिटेड - 14572 करोड़
उप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन-   319 करोड़
उत्तर प्रदेश जल निगम-     250 करोड़
कुल-                           32000 करोड़

राजकीय निर्माण निगम ने बिना सूचना जारी कर दिए 1047 करोड़ के वर्कआर्डर राजकीय निर्माण निगम ने 641.45 करोड़ रुपये के अर्जित ब्याज को कोषागार में जमा नहीं किया। साथ ही संविदाकारों से एडवांस पर ब्याज के रूप में वसूली गई 7.47 करोड़ की धनराशि को भी सरकारी खाते में जमा करने के बजाय अपनी आय का हिस्सा बता दिया। निर्माण निगम के इकाई प्रभारियों ने भी जमकर अनियमितता बरती।उन्होंने एमडी के आदेश के बिना और बोर्ड को सूचना दिए बगैर 1047 करोड़ के 52 कार्य आदेश (वर्क आर्डर) जारी कर दिए। ये सभी आदेश टेंडर के बजाय सूचीबद्ध ठेकेदारों से कोटेशन लेकर बांट दिए गए। निगम को 137 कार्यों में वित्तीय गड़बड़ियों के कारण 165.72 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।ऊर्जा के बाद नोएडा एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा इक्विटी निवेश सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने वर्ष 21-22 और 22-23 में ऊर्जा के बाद सबसे ज्यादा इक्विटी निवेश नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया। इन दो वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के 12 निगमों में 24795 करोड़ का निवेश किया गया। इसमें अकेले लगभग 21500 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड और उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में किया गया।दूसरे नंबर पर 1325 करोड़ के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और तीसरे नंबर पर 1257 करोड़ के साथ यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन रहा। इसके अलावा नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन, राज्य सड़क परिवहन निगम, मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन, बरेली स्मार्ट सिटी, कानपुर स्मार्ट सिटी, मुरादाबाद स्मार्ट सिटी और प्रयागराज स्मार्ट सिटी भी शामिल है।