इंदौर को मिली नई सौगात, इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने को तैयार
इंदौर। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत इंदौर को मिलने वाली इलेक्ट्रिक बसों की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है. अब तक 150 में से 40 बसें शहर पहुंच चुकी हैं, लेकिन इनके संचालन की शुरुआत में अभी डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है. शहर की लोक परिवहन व्यवस्था संभालने वाली एआइसीटीएसएल कंपनी इन बसों के लिए दो डिपो तैयार कर रही है, जिनका निर्माण अभी जारी है।
डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम जारी
इन बसों के लिए नायता मुंडला आईएसबीटी और देवास नाका क्षेत्र में डिपो बनाए जा रहे हैं, जहां चार्जिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. साथ ही टिकट कलेक्शन के लिए नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया भी जारी है, जिसका फैसला भोपाल स्तर पर लिया जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक, ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लागू करने के लिए एजेंसी का चयन एक महीने के भीतर किया जा सकता है, जिसके बाद ही बसों का संचालन शुरू होगा।
शुभारंभ की तैयारी और नई एजेंसी का चयन
बताया जा रहा है कि सभी बसों की डिलीवरी पूरी होने के बाद इनके शुभारंभ के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रित करने की योजना है. फिलहाल एआइसीटीएसएल के मौजूदा सिस्टम में बसों का टिकट कलेक्शन ऑपरेटर की टीम द्वारा किया जाता है, जबकि कंपनी की टीम निगरानी की जिम्मेदारी संभालती है।
इंदौर से अन्य शहरों तक रूट प्लानिंग
नई ई-बसों के संचालन के लिए करीब 32 रूट प्रस्तावित किए गए हैं. ये बसें न केवल इंदौर शहर में चलेंगी, बल्कि उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, भोपाल, धार, महेश्वर जैसे शहरों के बीच भी सेवाएं शुरू करने की योजना है. हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है और सर्वे के आधार पर रूट तय किए जा रहे हैं।
प्रदेश में ई-बसों का वितरण और स्थिति
प्रदेश में कुल 972 ई-बसों को मंजूरी मिली है, जिसमें इंदौर को सबसे ज्यादा 270 बसें आवंटित की गई हैं, जबकि भोपाल को 195 बसें मिली हैं. इसके अलावा जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, देवास और सतना जैसे शहरों में भी बसों का संचालन प्रस्तावित है।
कई शहरों में धीमी प्रगति बनी चुनौती
हालांकि कई शहरों में बुनियादी ढांचे का काम अधूरा होने के कारण परियोजना की गति धीमी बनी हुई है. जबलपुर में डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काम लगभग पूरा हो चुका है, जबकि ग्वालियर में भी अच्छी प्रगति देखी जा रही है. इसके उलट भोपाल और इंदौर सहित अन्य शहरों में निर्माण कार्य अभी अपेक्षाकृत धीमा है, जिसके चलते ई-बस सेवा की शुरुआत में देरी हो रही है।


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