अनुभवों की अनमोल धरोहर: प्रो. के.एल. जैन की पुस्तक 'जीवन का सारांश' का विमोचन; महाकौशल कॉलेज में जुटे शिक्षाविद् और साहित्यकार

जबलपुर| शासकीय महाकौशल महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रो. के.एल. जैन की विचारोत्तेजक कृति को समाज के सामने रखा गया। पुस्तक का केंद्र बिंदु जीवन के नैतिक मूल्य, सही समय पर सटीक निर्णय लेने की कला और समग्र व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण सूत्र हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने की।

चार दशकों के अनुभव का निचोड़

वक्ताओं ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि प्रो. जैन ने अपनी सवा चार दशक की सेवा के दौरान जो कुछ सीखा और देखा, उसे इस पुस्तक में बहुत ही सहजता से उतारा है। यह पुस्तक केवल पठन सामग्री नहीं, बल्कि युवाओं और प्रशासनिक क्षेत्र में आने वाले लोगों के लिए एक मार्गदर्शिका (गाइड) के रूप में कार्य करेगी।

विशिष्ट अतिथियों और प्रबुद्ध जनों का संगम

इस विमोचन समारोह में उच्च शिक्षा विभाग के कई दिग्गज शामिल हुए:

  • मुख्य उपस्थिति: पूर्व अतिरिक्त संचालक डॉ. संतोष जाटव, वर्तमान अतिरिक्त संचालक प्रो. पंजाबराव चंदेलकर और संभागीय नोडल अधिकारी प्रो. अरुण शुक्ल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

  • समीक्षा: संध्या जैन और श्रुति ने 'जीवन का सारांश' की गहन समीक्षा प्रस्तुत करते हुए पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

  • साहित्यिक तड़का: आयोजन में काव्य पाठ का भी आनंद लिया गया, जहाँ राज सागरी, सुरेश मिश्र विचित्र और मौलिक अमित जैन ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।

आयोजन टीम और सहभागिता

इस साहित्यिक अनुष्ठान को सफल बनाने में प्रो. सर्वेश ताम्रकार, डॉ. प्रतिभा कुमार, डॉ. समता नायडू और डॉ. पुष्पा तनेजा सहित महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम का सुचारू संचालन हिंदी विभाग की डॉ. तृप्ति उकास ने किया, जबकि अंत में डॉ. आनंद सिंह राणा ने उपस्थित सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रमुख विद्वानों की उपस्थिति

कार्यक्रम में शहर के कई जाने-माने साहित्यकार और प्रबुद्ध जन मौजूद रहे, जिनमें शरद चंद पालन, डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, पं. राजेश दुबे, आचार्य उमाशंकर दुबे और राजेन्द्र मिश्र प्रमुख थे। सभी ने एक स्वर में प्रो. जैन की इस साहित्यिक पहल का स्वागत किया।