चंडीगढ़: पंजाब के आसमान पर मानसून के बादलों ने अपनी मजबूत दस्तक दे दी है, जिससे पूरे सूबे में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। गुरुवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। कई इलाकों में रिमझिम तो कहीं मध्यम दर्जे की बौछारें पड़ने से फिजां में ठंडक घुल गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों के लिए अपनी चौकसी बढ़ा दी है और जनता को मौसम के बदलते रुख के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है।

आगामी दिनों में मूसलाधार आफत की आशंका, यलो अलर्ट जारी

मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के मौजूदा हालातों को देखते हुए आने वाले दिनों के लिए चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक शुक्रवार को प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में मेघ बरसेंगे, जबकि वीकेंड यानी शनिवार और रविवार को स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। सप्ताहांत के लिए मौसम विभाग ने भारी बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया है, जिसमें पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली जैसे जिलों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में कुछ जगहों पर अत्यंत तीव्र गति से मूसलाधार बारिश होने का अनुमान जताया गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन को भी मुस्तैद रहने को कहा गया है।

राजपुरा में जलभराव से बढ़ीं मुश्किलें, तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव

शुक्रवार के तड़के सुबह राजपुरा और उसके आस-पास के इलाकों में हुई जोरदार बरसात ने जहां एक तरफ मौसम सुहाना किया, वहीं दूसरी तरफ शहरी ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलकर रख दी। सुबह-सुबह हुई इस तेज बारिश के बाद सड़कों और निचले इलाकों में भारी जलजमाव देखने को मिला, जिसके चलते दफ्तर और जरूरी कामों के लिए निकले राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस बीच मोहाली, लुधियाना, रूपनगर और पटियाला सहित कई अन्य जिलों में भी बारिश का आंकड़ा दर्ज किया गया। वर्षा के बावजूद अधिकतम पारे में आंशिक बढ़त दर्ज की गई, हालांकि यह अब भी सामान्य स्तर से काफी नीचे बना हुआ है, जबकि फरीदकोट का इलाका सबसे गर्म दर्ज किया गया।

जून-जुलाई के कोटे में बड़ी गिरावट, मानसून की बेरुखी अब भी बरकरार

भले ही मौजूदा समय में बारिश की फुहारें राहत दे रही हैं, लेकिन चालू सीजन के आंकड़े अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जुलाई के शुरुआती सप्ताह में पंजाब को जितनी बारिश मिलनी चाहिए थी, धरातल पर उसकी आधी मात्रा भी नसीब नहीं हुई है। इस समयावधि के दौरान राज्य में सामान्य के मुकाबले बेहद कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो कि तय कोटे से लगभग साठ प्रतिशत कम है। मानसून के इस असंतुलित रवैये ने पर्यावरणविदों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि शुरुआती कमी की भरपाई के लिए आने वाले दिनों में लगातार और अच्छी बारिश होना बेहद जरूरी है।

खरीफ फसलों को मिला नया जीवनदान, भूजल स्तर गिरने का बढ़ा खतरा

कृषि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में हो रही यह मानसूनी बारिश धान सहित अन्य खरीफ फसलों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। इस प्राकृतिक वर्षा से खेतों की मिट्टी में जरूरी नमी वापस लौटेगी, जिससे पौधों के विकास को गति मिलेगी और किसानों की सिंचाई की लागत भी कम होगी। हालांकि, विशेषज्ञों ने एक बड़ा नीतिगत अलर्ट भी जारी किया है। उनका कहना है कि यदि पूरे मानसूनी सीजन के दौरान बारिश का ग्राफ इसी तरह सामान्य से नीचे बना रहता है, तो फसलों को बचाने के लिए किसानों को ट्यूबवेलों पर निर्भर होना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में धरती के नीचे का जलस्तर (ग्राउंड वॉटर) और अधिक तेजी से नीचे खिसक सकता है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा संकट साबित होगा।