डॉक्टर न मिलने से बढ़ी नाराजगी, ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन
सारण। जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत पचखंडा गांव में रविवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां तालाब में डूबने से केंद्रीय विद्यालय के एक मासूम छात्र की असमय मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद उस समय स्थिति और बिगड़ गई जब परिजन बच्चे को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मशरक पहुंचे, लेकिन वहां कोई भी मुख्य चिकित्सक उपस्थित नहीं था। डॉक्टर की इस अनुपस्थिति से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए करीब एक घंटे तक मुख्य सड़क को जाम कर दिया।
दोस्तों के साथ खेलते समय गहरे पानी में उतरा मासूम, गांव में पसरा मातम
मृतक बच्चे की पहचान पचखंडा गांव के रहने वाले मंटू शर्मा के 11 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है, जो मशरक के केंद्रीय विद्यालय में चौथी कक्षा का छात्र था। बताया जा रहा है कि मनीष गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलते-खेलते चंवर स्थित एक तालाब के पास चला गया था। वहां कुछ बच्चों को नहाते देख वह भी गहरे पानी में उतर गया और डूबने लगा। साथ खेल रहे बच्चों की चीख-पुकार सुनकर दौड़े स्थानीय ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद मनीष को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी।
अस्पताल में नहीं मिला MBBS डॉक्टर, परिजनों का फूटा गुस्सा
घटना की जानकारी मिलते ही डायल-112 की पुलिस टीम तुरंत सक्रिय हुई और बच्चे को इलाज के लिए सीएचसी मशरक लेकर आई। अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को पता चला कि वहां आपातकालीन स्थिति को संभालने के लिए कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं था। इस घोर लापरवाही को देखकर मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का सब्र टूट गया। आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल परिसर को घेरकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार हंगामा और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
आयुष डॉक्टर के भरोसे चल रही थी इमरजेंसी, रोस्टर नियमों की उड़ी धज्जियां
स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मशरक सीएचसी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और ड्यूटी से गायब रहने का यह कोई पहला मामला नहीं है। आपातकालीन हालातों में भी यहाँ मरीजों को समय पर इलाज नसीब नहीं होता। घटना के समय अस्पताल में केवल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जुड़े एक आयुष चिकित्सक ही ड्यूटी पर तैनात थे। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव द्वारा पूर्व में जारी किए गए शिफ्टवार ड्यूटी रोस्टर के बावजूद अस्पताल प्रशासन डॉक्टरों की नियमित तैनाती सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
सड़क जाम से एक घंटे तक थमा रहा यातायात, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इकलौते चिराग की मौत और अस्पताल की इस संवेदनहीनता से नाराज ग्रामीणों ने मुख्य सड़क पर धरना देकर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब एक घंटे तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं और यातायात पूरी तरह ठप रहा। इधर, हादसे के बाद से पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे पचखंडा गांव में इस घटना के बाद से मातम का माहौल है और लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


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