नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए साल 2020 के एक बेहद बर्बर लूट और जानलेवा हमले के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे मास्टरमाइंड ब्रह्मदेव भगत को दबोच लिया है। पुलिस ने आरोपी को बिहार के पूर्णिया जिले से गिरफ्तार किया है। वह पिछले 6 सालों से कानून की आंख में धूल झोंककर छिप रहा था। लगातार पुलिस को छकाने के कारण अदालत ने 11 दिसंबर 2025 को उसे भगोड़ा (घोषित अपराधी) भी करार दे दिया था।


पार्टी बुकिंग के बहाने बुलाया और चाकू की नोक पर की हैवानियत

यह खौफनाक मामला 17 मार्च 2020 का है, जब एक इवेंट मैनेजर सुरिंदर नंदा को किसी अज्ञात व्यक्ति ने बड़ी पार्टी की बुकिंग के सिलसिले में फोन किया था। व्यस्त होने के कारण सुरिंदर ने पहले अपने मैनेजर कपिल चड्ढा को द्वारका सेक्टर-23 भेजा, और बाद में खुद भी अपने ड्राइवर रमेश के साथ वहां पहुंच गए। वहां उन्हें एक मकान में ले जाया गया, जहां सुरिंदर का पुराना सब्जी सप्लायर ब्रह्मदेव भगत अपने तीन गुर्गों के साथ पहले से घात लगाए बैठा था। कमरे में बंधक बनाकर सबने सुरिंदर की डंडों से बेरहमी से पिटाई की, चाकू दिखाकर उनकी हीरे की अंगूठी और 27 हजार रुपये कैश लूट लिए। इतना ही नहीं, बदमाशों ने जान से मारने की धमकी देकर जबरन 11 लाख रुपये के कथित बकाया पेपर्स पर दस्तखत भी करवा लिए।

प्रतिशोध में काट दिए थे पीड़ित के दोनों अंगूठे, दर्ज हुआ था केस

वारदात के दौरान क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए मुख्य आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने चाकू से सुरिंदर नंदा के दोनों हाथों के अंगूठे काट डाले थे। इस भयावह कृत्य के बाद आरोपी पीड़ितों को तड़पता छोड़कर भाग गए। गंभीर हालत में घायल सुरिंदर नंदा को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। 18 मार्च 2020 को द्वारका सेक्टर-23 थाने में अपहरण, लूट और जानलेवा हमले जैसी संगीन धाराओं (IPC 342, 394, 397, 506 और 34) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

तीन साथी पहले ही चढ़े थे पुलिस के हत्थे, सरगना बदल रहा था ठिकाने

मामले की तफ्तीश के दौरान स्थानीय पुलिस ने वारदात में शामिल तीन अन्य आरोपियों—जितेंद्र, अमरदीप और गौतम को तो पहले ही सलाखों के पीछे भेज दिया था, लेकिन मुख्य सूत्रधार ब्रह्मदेव भगत पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था। वह गिरफ्तारी के डर से लगातार अपने राज्य, शहर और ठिकाने बदल-बदलकर छिप रहा था, जिससे पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई थीं।

बिहार में बिछाया गया जाल; किराना दुकान चला रहा था 70 वर्षीय आरोपी

क्राइम ब्रांच के एसीपी उमेश बर्थवाल की देखरेख में इंस्पेक्टर योगेश और इंस्पेक्टर विनोद यादव की एक स्पेशल टीम लगातार इस भगोड़े की टोह में थी। 15 मई 2026 को पुलिस को सटीक खुफिया इनपुट मिला कि आरोपी बिहार के पूर्णिया में छिपा हुआ है। दिल्ली पुलिस की टीम ने तुरंत पूर्णिया पहुंचकर जाल बिछाया और घेराबंदी कर ब्रह्मदेव भगत को दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। 5वीं पास 70 साल का ब्रह्मदेव पहले दिल्ली की आजादपुर मंडी में थोक सब्जी का कारोबार करता था, लेकिन इस खूनी खेल को अंजाम देने के बाद वह पूर्णिया भाग गया था और वहां अपनी पहचान छिपाकर एक छोटी सी किराना दुकान चला रहा था।