सुरक्षा मानकों में भारी चूक और अवैध परिसर का खुलासा

नई दिल्ली: देश की राजधानी के जनकपुरी स्थित एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में नर्सरी की मासूम बच्ची के साथ हुई यौन शोषण की घटना ने शिक्षा विभाग को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रबंधन को 'कारण बताओ नोटिस' जारी करते हुए पूछा है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने पर स्कूल का अधिग्रहण (टेकओवर) क्यों न कर लिया जाए। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि स्कूल की प्री-प्राइमरी कक्षाएं मुख्य परिसर से एक किलोमीटर दूर एक ऐसी निजी इमारत में चल रही थीं, जिसे विभाग से मान्यता प्राप्त ही नहीं थी। यह सीधे तौर पर डीडीए के भूमि आवंटन नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

अभिभावकों का फूटा गुस्सा और पुलिस की कानूनी कार्रवाई

इस सनसनीखेज वारदात के बाद स्कूल के बाहर अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने उनसे बात करने के लिए साढ़े चार घंटे तक इंतजार कराया और शुरू में सहयोग करने से इनकार कर दिया। वहीं, कानूनी मोर्चे पर पुलिस ने आरोपी केयरटेकर को गिरफ्तार कर लिया था, जिसे फिलहाल स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि, डीसीपी भीष्म शरद थरकार के अनुसार, पुलिस अब हाई कोर्ट का रुख कर आरोपी की जमानत रद्द करवाने की प्रक्रिया में जुटी है। विभाग ने स्कूल से सीसीटीवी फुटेज, स्टाफ का विवरण और फायर व बिल्डिंग सेफ्टी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तलब किए हैं।

मामले पर गरमाई राजनीति और एलजी से हस्तक्षेप की मांग

यह संवेदनशील मामला अब राजनीतिक गलियारों तक भी पहुँच गया है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है और पुलिस प्रशासन की जांच में लापरवाही बरती गई है। 'आप' ने दिल्ली पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, स्कूल ने सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए डेढ़ महीने का समय माँगा है, लेकिन शिक्षा निदेशालय के कड़े रुख से स्कूल की मान्यता पर संकट मंडरा रहा है।