गौड़ ग्रीन एवेन्यू अग्निकांड: दमकल विभाग की देरी और बदइंतजामी ने बढ़ाई तबाही

इंदिरापुरम (गाजियाबाद): गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में लगी भीषण आग ने एक बार फिर अग्निशमन विभाग की सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। हादसे के दौरान हाइड्रोलिक सिस्टम वाली गाड़ी को पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे की देरी हुई, जिससे आग विकराल हो गई और करोड़ों का नुकसान हो गया।

पास होने के बावजूद देरी से पहुंची मदद

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, सुबह 8:31 बजे एक फ्लैट में आग लगी जो देखते ही देखते फैल गई। चौंकाने वाली बात यह है कि घटनास्थल से महज 800 मीटर पर पुलिस चौकी और 2 किलोमीटर के दायरे में एसीपी कार्यालय, थाना और खुद दमकल विभाग का कार्यालय स्थित है। इसके बावजूद, दमकल की टीम 8:57 बजे मौके पर पहुँची और वह भी आधी-अधूरी तैयारी के साथ। हाइड्रोलिक सिस्टम की मांग साढ़े नौ बजे की गई, जो राहत कार्य के लिए बहुत देर साबित हुई।

निवासियों ने खुद संभाला मोर्चा

दमकल विभाग के विफल रहने पर सोसाइटी के लोगों ने खुद ही आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। पड़ोस के टावर से सबमर्सिबल पंप, पाइप और बाल्टियों के जरिए बचाव कार्य किया गया। बाद में गौतमबुद्धनगर से मंगाए गए हाइड्रोलिक सिस्टम की मदद से 9वीं और 12वीं मंजिल तक पानी पहुँचाया गया, लेकिन तब तक फ्लैट्स जलकर राख हो चुके थे।

इन लोगों का किया गया सफल रेस्क्यू

मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) राहुल पाल ने बताया कि मौके से अय्यूब (82), सुधांशु शर्मा (88), रुचि शर्मा (57), कुसुम शर्मा (68), अनूप कुमार (55), अनुराग शर्मा (53), वीवा अग्रवाल (44), कमल अरोरा (49), आयुष (19) और कुसुम (45) को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा का अभाव

साहिबाबाद और आसपास की बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले करीब 5 लाख लोगों की जान जोखिम में है। करोड़ों के फ्लैट और भारी मेंटेनेंस शुल्क के बावजूद, फायर सेफ्टी के इंतजाम कागजों तक ही सीमित हैं। हालिया सर्वे (नवंबर 2025 - फरवरी 2026) में खुलासा हुआ है कि:

  • करीब 50 बहुमंजिला इमारतों में फायर सेफ्टी से जुड़ी गंभीर खामियां मिली हैं।

  • 500 से अधिक आवासीय परिसरों में से कई के पास या तो एनओसी (NOC) नहीं है या उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया है।

  • नियमों के अनुसार हर 5 साल में एनओसी का रिन्यूअल अनिवार्य है, लेकिन सोसायटियों और प्रतिष्ठानों द्वारा इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।