हाईटेक होगा मध्य प्रदेश का मौसम विभाग: 9 महीने में पूरा होगा 'डिजिटल वेदर' मिशन
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए राज्य की 23,634 ग्राम पंचायतों में ऑटोमैटिक रेन गेज और 444 तहसीलों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाने का निर्णय लिया है। यह पूरा नेटवर्क WINDS सिस्टम से जुड़ा होगा, जो हर 15 मिनट में बारिश और मौसम का डेटा सीधे सरकार के सर्वर पर भेजेगा।
क्यों पड़ी इस सिस्टम की जरूरत?
अभी तक मौसम की सटीक जानकारी केवल जिला या ब्लॉक स्तर पर ही मिल पाती है, जिससे गांव स्तर पर होने वाली अतिवृष्टि या सूखे का सही आकलन नहीं हो पाता था। इस नए डिजिटल सिस्टम से अब प्रत्येक गांव का डेटा उपलब्ध होगा, जिससे किसानों की फसल के नुकसान का सटीक जायजा लेना आसान हो जाएगा।
लागत और कार्यान्वयन:
इस प्रोजेक्ट का कुल बजट 100 से 120 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार 50% 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' देगी। एक रेन गेज की लागत करीब 40 हजार और वेदर स्टेशन की लागत लगभग 2 लाख रुपये तक होगी। अप्रैल 2026 में टेंडर प्रक्रिया के बाद इसे 6 से 9 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
किसानों को लाभ:
सटीक डेटा से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों का निपटारा विवाद-मुक्त और तेज होगा। साथ ही, किसानों को बुवाई और कटाई के लिए अपने गांव की सटीक मौसम रिपोर्ट मिल सकेगी। यह नेटवर्क आपदा प्रबंधन में भी मददगार साबित होगा, जिससे आंधी और भारी बारिश की पूर्व चेतावनी समय रहते दी जा सकेगी।


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