दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार का यह कहना कि कोविड की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई है, यह पूरी तरह से झूठ और संवेदनहीन बयान है। दरअसल केंद्र सरकार ने अपनी गलत नीतियों के चलते जो ऑक्सीजन संकट पैदा किया था, उसकी नाकामी छुपाने के लिए यह बयान दे रही है। वह ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत की जिम्मेदारी लेने के बजाएं अपना पल्ला झाड़ रही है। 

प्रेस कांफ्रेस करके मनीष सिसोदिया ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पूरे देश में ऑक्सीजन की कमी से त्राहि-त्राहि मची हुई थी। लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे थे। दिल्ली में खुद मैं ऑक्सीजन का प्रबंधन देख रहा था। मैं महसूस कर रहा था किस तरह अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो रहा था। ऑक्सीजन की कमी से देशभर में लोग अपने लोगों को खो रहे थे। यह सब 13 अप्रैल के बाद ऑक्सीजन को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के चलते हुई। 

सिसोदिया ने कहा यह बेहद शर्म की बात है कि केंद्र सरकार संसद में यह कह रही है कि राज्यों ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की कोई जानकारी नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह से झूठ बोल रही है। केंद्र सरकार ने राज्यों को ऑक्सीजन से मौत की जांच नहीं करने देगी तो हम कैसे कहेंगे। उन्होंने कहा कि आज अगर आप मुझसे पूछेंगे तो दिल्ली में ऑक्सीजन से कितने लोग मरे तो मेरे पास आंकड़े नहीं है। क्योंकि भाजपा की केंद्र सरकार यह जांच ही नहीं करने दे रही है। जबकि सच यह है कि ऑक्सीजन की कमी से लोग मर रहे थे। उसके बाद भी भाजपा के लोग इसकी जिम्मेदारी लेने के बजाए झूठ बोल रहे है गैर भाजपा सरकारों के मुख्यमंत्रियों से लड़ने और गालियां देने आगे आ जाते है। 

जब मौतों की जांच नहीं करने देंगे तो राज्य आंकड़े कैसे देंगे

मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार बार बार झूठ बोल रही है कि राज्यों ने उन्हें आंकड़े नहीं दिए। लेकिन जब आप राज्यों को ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत की जांच ही नहीं करने देंगे तब आंकड़े कहां से आ जायेंगे। सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जांच करने और सहायता राशि देने के लिए डेथ ऑडिट कमेटी का गठन किया था। केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल के द्वारा इस कमिटी को खारिज़ करा दिया।  उन्हें डर था कि ये कमिटी उनके ऑक्सीजन कुप्रबंधन सबके सामने ले आएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा की यदि केंद्र सरकार में हिम्मत है और यदि ये चाहते हैं कि ऑक्सीजन की कमी से हुए मौतों की जांच हो और उसकी जिम्मेदारी तय की जाए तो दिल्ली सरकार द्वारा गठित की गई ऑक्सीजन से होने वाली मौत की जांच कमिटी को काम करने दे।