जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को लगाएं ये 5 पारंपरिक भोग: माखन-मिश्री से लेकर धनिया पंजीरी तक, जानिए बनाने का तरीका

मथुरा: देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं तथा मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के उपरांत विधि-विधान से पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में छप्पन भोग का विशेष महत्व है, किंतु यदि इतने पकवान बनाना संभव न हो, तो घर पर निर्मित 5 पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाकर भी लड्डू गोपाल को प्रसन्न किया जा सकता है।

कान्हा के लिए 5 मुख्य पारंपरिक भोग

  • 1. माखन-मिश्री: बाल कृष्ण को माखन अति प्रिय होने के कारण यह जन्माष्टमी का सबसे मुख्य भोग माना जाता है। ताजे सफेद मक्खन में मिश्री के दाने मिलाकर यह प्रसाद तैयार किया जाता है। इसमें बादाम, पिस्ता व केसर डालकर कान्हा को अर्पित किया जा सकता है।

  • 2. धनिया पंजीरी: जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का विशेष धार्मिक महत्व है। देशी घी में पिसे धनिये को भूनकर उसमें पिसी शक्कर, भुने मखाने, काजू, बादाम, किशमिश और इलायची मिलाकर यह प्रसाद तैयार किया जाता है। पूजा के उपरांत इसे श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

  • 3. पंचामृत: भगवान कृष्ण के अभिषेक और प्रसाद हेतु दूध, दही, देसी घी, शहद और मिश्री को मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है। इसमें तुलसी दल मिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • 4. खीर या मखाना खीर: दूध और चावल को धीमी आंच पर पकाकर गाढ़ी खीर तैयार की जाती है, जिसमें केसर, इलायची व मेवे मिलाए जाते हैं। विकल्प के तौर पर मखाना खीर भी भोग के रूप में अर्पित की जा सकती है।

  • 5. मावा पेड़ा: मावा (खोया) को भूनकर उसमें चीनी व इलायची मिलाकर पेड़े तैयार किए जाते हैं। पिस्ता और केसर से सुसज्जित यह मिष्ठान कान्हा के भोग के लिए उत्तम माना जाता है।